पश्चिमी मीडिया ने दावा किया कि यूक्रेन की NATO में शामिल होने की राह में अमेरिका ही सबसे बड़ा रोड़ा बन गया। बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स में अमेरिका और NATO देशों की बैठक में फ़ैसला लिया गया कि जबतक रूस और यूक्रेन का युद्ध ख़त्म नहीं होगा। तबतक यूक्रेन NATO में शामिल नहीं हो सकता। क्योंकि ये नियमों के ख़िलाफ़ होगा।

मतलब जिस अमेरिका के दम पर ज़ेलेंस्की ने पुतिन से दुश्मनी मोल ली है। वही उनकी पीठ में छुरा घोंपने में लगा है। पश्चिमी मीडिया का दावा हैं कि बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स में जो बैठक हुई, वो अमेरिका के कहने पर हुई थी। और इस बैठक में जो फ़ैसला लिया गया। उसमें भी अमेरिका ही शामिल था। मतलब अमेरिका सीधे सीधे रूस से दुश्मनी लेना नहीं चाहता। अमेरिका इस जंग को यूक्रेन तक ही सीमित रखना चाहता है